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“एक बोर्ड – हजारों बीघा गौचर भूमि की सुरक्षा की ओर एक कदम”

गौचर बचाओ अभियान – चरागाह भूमि की पहचान एवं संरक्षण हेतु जनसहयोग की मार्मिक अपील

 

*गौचर बचाओ अभियान – चरागाह भूमि की पहचान एवं संरक्षण हेतु जनसहयोग की मार्मिक अपील*
“एक बोर्ड – हजारों बीघा गौचर भूमि की सुरक्षा की ओर एक कदम”

राजस्थान की संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुधन का आधार उसकी चरागाह (गौचर) भूमि रही है। दुर्भाग्यवश आज राज्य की हजारों हेक्टेयर चरागाह भूमि अतिक्रमण, सीमांकन की अस्पष्टता एवं जन-जागरूकता के अभाव के कारण अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।

इसी गंभीर समस्या के समाधान हेतु गौचर बचाओ फाउंडेशन द्वारा एक महत्वाकांक्षी एवं जनहितकारी अभियान प्रारम्भ किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2031 तक सम्पूर्ण राजस्थान की चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में ठोस एवं व्यवस्थित कार्य करना है।

*प्रथम चरण – चरागाह भूमि की पहचान सुनिश्चित करना*

किसी भी भूमि की सुरक्षा का पहला कदम उसकी स्पष्ट पहचान है। इसी उद्देश्य से फाउंडेशन द्वारा प्रथम चरण में भीलवाड़ा जिले की प्रत्येक चरागाह भूमि (गौचर खसरा) पर स्थायी लोहे के पहचान बोर्ड स्थापित करने का कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है।

भीलवाड़ा जिले में लगभग:

400 ग्राम पंचायतें
2000 से अधिक गांव
लगभग 11,000 चरागाह खसरे स्थित हैं।

प्रत्येक चरागाह खसरे पर एक मजबूत एवं स्थायी लोहे का बोर्ड स्थापित किया जाएगा, जिस पर स्पष्ट रूप से अंकित रहेगा कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में चरागाह (गौचर) भूमि के रूप में दर्ज है तथा इस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण, कब्जा अथवा उपयोग विधि-विरुद्ध है।

एक बोर्ड की लागत

एक बोर्ड स्थापित करने में लगभग ₹2,800/- की लागत आती है, जिसमें निम्न कार्य सम्मिलित हैं—

✔ मजबूत लोहे का बोर्ड निर्माण
✔ चेतावनी एवं पहचान संबंधी लेखन एवं रंगाई
✔ बोर्ड का परिवहन
✔ गड्ढा खुदाई
✔ सीमेंट, गिट्टी एवं कंक्रीट द्वारा स्थायी स्थापना
✔ श्रम एवं अन्य तकनीकी व्यय

कुल अनुमानित लागत

लगभग 11,000 बोर्डों की स्थापना हेतु कुल अनुमानित लागत ₹3,08,00,000/- (तीन करोड़ आठ लाख रुपये) है।

यह कार्य चरणबद्ध रूप से किया जाएगा तथा वर्ष 2028 तक भीलवाड़ा जिले की समस्त चरागाह भूमि पर पहचान बोर्ड स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस अभियान से होने वाले लाभ
1. चरागाह भूमि की स्पष्ट पहचान

ग्रामवासियों, प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को तत्काल ज्ञात हो सकेगा कि कौन-सी भूमि चरागाह के रूप में सुरक्षित है।

2. अतिक्रमण पर प्रभावी रोक

जब प्रत्येक खसरे पर स्थायी पहचान बोर्ड होगा तो अवैध कब्जे एवं अतिक्रमण की संभावनाएं स्वतः कम होंगी।

3. प्रशासनिक कार्रवाई में सुविधा

राजस्व एवं स्थानीय प्रशासन को चरागाह भूमि की सुरक्षा एवं संरक्षण में सहायता मिलेगी।

4. गौवंश एवं पशुधन संरक्षण

चरागाह भूमि सुरक्षित रहने से पशुओं के लिए प्राकृतिक चारे एवं चराई क्षेत्र का संरक्षण होगा।

5. भावी पीढ़ियों के लिए धरोहर संरक्षण

ग्राम समाज की सार्वजनिक भूमि सुरक्षित रहकर आने वाली पीढ़ियों को उपलब्ध रहेगी।

आपका छोटा सहयोग, हजारों बीघा गौचर भूमि की रक्षा कर सकता है

यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पर्यावरण, गौवंश एवं ग्रामीण संसाधनों को बचाने का जनआंदोलन है।

आप इस पुण्य एवं जनहितकारी कार्य में अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

₹2,800/- से एक पूर्ण बोर्ड स्थापित कराया जा सकता है।
₹5,600/- से दो चरागाह खसरों की पहचान सुनिश्चित की जा सकती है।
₹28,000/- से दस गौचर खसरों की सुरक्षा की दिशा में योगदान दिया जा सकता है।
संस्थाएं, उद्योग, सामाजिक संगठन एवं भामाशाह अपने सामर्थ्य अनुसार अधिक संख्या में बोर्ड प्रायोजित कर सकते हैं।

आपके द्वारा दिया गया प्रत्येक रुपया केवल और केवल चरागाह भूमि की पहचान एवं संरक्षण कार्य में ही उपयोग किया जाएगा।

आइये, मिलकर राजस्थान की गौचर भूमि बचाएं

*आज लगाया गया एक बोर्ड, कल हजारों बीघा सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से बचा सकता है।*

गौचर बचाओ फाउंडेशन आपको इस जनहितकारी अभियान का सहभागी बनने हेतु विनम्र आमंत्रण देता है।

“चरागाह बचेगी – तो गौवंश बचेगा,
गौवंश बचेगा – तो ग्रामीण संस्कृति बचेगी।”

दान एवं सहयोग हेतु संपर्क करें

गौचर बचाओ फाउंडेशन

*आइये, राजस्थान की चरागाह भूमि को सुरक्षित एवं अतिक्रमण मुक्त बनाने के इस ऐतिहासिक अभियान में अपना अमूल्य योगदान दें।*

गौचर भूमि पहचान एवं संरक्षण अभियान

परियोजना : गौचर भूमि पहचान एवं संरक्षण अभियान

परियोजना का नाम

"एक बोर्ड – हजारों बीघा गौचर भूमि की सुरक्षा की ओर एक कदम"

परियोजना परिचय

राजस्थान की चरागाह (गौचर) भूमि राज्य की पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुधन संसाधनों, जैव विविधता एवं पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला रही है। विगत वर्षों में चरागाह भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण, सीमांकन संबंधी अस्पष्टताओं एवं जन-जागरूकता की कमी के कारण इन सार्वजनिक संसाधनों का निरंतर क्षरण हो रहा है।

इसी चुनौती के समाधान हेतु गौचर बचाओ फाउंडेशन द्वारा "गौचर भूमि पहचान एवं संरक्षण अभियान" प्रारम्भ किया गया है। यह एक दीर्घकालिक एवं चरणबद्ध परियोजना है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2031 तक राजस्थान की चरागाह भूमि के संरक्षण, पहचान, दस्तावेजीकरण एवं अतिक्रमण-मुक्ति की दिशा में प्रभावी कार्य करना है।

परियोजना का उद्देश्य

इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य राजस्व अभिलेखों में दर्ज चरागाह (गौचर) भूमि की स्पष्ट एवं स्थायी पहचान स्थापित कर उसके संरक्षण हेतु सामाजिक एवं प्रशासनिक आधार तैयार करना है।

परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक चरागाह खसरे पर स्थायी लोहे के सूचना एवं चेतावनी बोर्ड स्थापित किए जाएंगे, जिससे भूमि की वास्तविक स्थिति एवं कानूनी प्रकृति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो सके।

प्रथम चरण : भीलवाड़ा जिला

परियोजना के प्रथम चरण में राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की समस्त चरागाह भूमि का चिन्हीकरण किया जा रहा है।

अनुमानित कार्यक्षेत्र

  • लगभग 400 ग्राम पंचायतें
  • 2,000 से अधिक राजस्व ग्राम
  • लगभग 11,000 चरागाह (गौचर) खसरे

प्रत्येक चिन्हित खसरे पर एक स्थायी पहचान बोर्ड स्थापित किया जाएगा, जिसमें यह स्पष्ट रूप से अंकित होगा कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में चरागाह (गौचर) भूमि के रूप में दर्ज है तथा उस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, अवैध कब्जा अथवा गैर-अनुमोदित उपयोग विधि-विरुद्ध है।

तकनीकी कार्यप्रणाली

प्रत्येक बोर्ड की स्थापना निम्न मानकों के अनुसार की जाएगी—

  • उच्च गुणवत्ता वाले लोहे से निर्मित स्थायी बोर्ड
  • मौसमरोधी रंग एवं लेखन
  • चेतावनी एवं भूमि पहचान संबंधी सूचना अंकन
  • स्थल तक परिवहन
  • निर्धारित मापदंडों के अनुसार गड्ढा खुदाई
  • सीमेंट, गिट्टी एवं कंक्रीट द्वारा स्थायी फाउंडेशन
  • तकनीकी पर्यवेक्षण एवं श्रम व्यय

परियोजना लागत

विवरण संख्या अनुमानित लागत एक पहचान बोर्ड 1 ₹2,800 कुल प्रस्तावित बोर्ड 11,000 ₹3,08,00,000

परियोजना को चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाएगा तथा वर्ष 2028 तक भीलवाड़ा जिले की समस्त चरागाह भूमि पर पहचान बोर्ड स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अपेक्षित परिणाम एवं प्रभाव

1. चरागाह भूमि की स्पष्ट पहचान

सार्वजनिक एवं प्रशासनिक स्तर पर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

2. अतिक्रमण नियंत्रण

स्थायी चिन्हीकरण के माध्यम से अवैध कब्जों एवं अतिक्रमण की संभावनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।

3. प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण

राजस्व, पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन को संरक्षण संबंधी कार्रवाई में सुविधा प्राप्त होगी।

4. पशुधन एवं पर्यावरण संरक्षण

चरागाह क्षेत्र सुरक्षित रहने से गौवंश एवं अन्य पशुधन के लिए प्राकृतिक चराई क्षेत्र संरक्षित रहेगा।

5. सामुदायिक संसाधनों का संरक्षण

ग्राम समाज की सार्वजनिक भूमि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहेगी।

जनसहभागिता एवं सहयोग

यह परियोजना केवल भूमि संरक्षण का प्रयास नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत, पशुधन संसाधनों एवं ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण का जनआंदोलन है।

नागरिक, सामाजिक संस्थाएँ, उद्योग समूह, कॉर्पोरेट संस्थान एवं भामाशाह निम्न प्रकार से सहयोग कर सकते हैं—

  • ₹2,800 – एक पहचान बोर्ड प्रायोजन
  • ₹5,600 – दो चरागाह खसरों का चिन्हीकरण
  • ₹28,000 – दस चरागाह खसरों की पहचान एवं संरक्षण में सहयोग
  • संस्थागत प्रायोजन – आवश्यकता अनुसार बहुसंख्यक बोर्डों का सहयोग

फाउंडेशन द्वारा प्राप्त प्रत्येक सहयोग राशि का उपयोग केवल एवं केवल चरागाह भूमि की पहचान, चिन्हीकरण एवं संरक्षण संबंधी कार्यों में किया जाएगा।

हमारा संकल्प

"आज स्थापित किया गया एक पहचान बोर्ड, भविष्य में हजारों बीघा सार्वजनिक चरागाह भूमि को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने का आधार बन सकता है।"

गौचर बचाओ फाउंडेशन राजस्थान की चरागाह भूमि को सुरक्षित, संरक्षित एवं अतिक्रमण-मुक्त बनाने हेतु समाज के प्रत्येक वर्ग को इस ऐतिहासिक अभियान का सहभागी बनने के लिए आमंत्रित करता है।

"चरागाह बचेगी – तो गौवंश बचेगा,

गौवंश बचेगा – तो ग्रामीण संस्कृति बचेगी।"

गौचर बचाओ फाउंडेशन
चरागाह संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण संसाधनों के सतत विकास हेतु समर्पित।